एक बार अवश्य सोचे

2018-12-28 10:32:24
(एक बार अवश्य पढ़ें ) Vinay kaushik KTV24News क्या हर अपराध हर बलात्कार हर फ़साद की जिम्मेदारी सिर्फ़ सरकार की है या सिर्फ़ पुलिस की है मेरे इस लेख, को पढ़ कर सोचियेगा के आज के हालात का जिम्मेदार कौन है सरकार पुलिस प्रशासन या फ़िर समाज नाकामी के नाम पर सरकार की और प्रशासन की नाकामी है या समाज की नाकामी ? हमारे आप के बीच कोई इतनी खराब मानसिकता का आदमी रह रहा है जो छोटी बच्चियों में भी वासना तलाश रहा है, और बलात्कार कर रहा है हमारे आप के ही बीच ऐसा आदमी रह रहा है जो अपनी वासना में अंधा हो कर बलात्कार कर रहा है और मासूमों की जान लेने से भी नहीं हिचक रहा है हमारे आप के ही बीच ऐसे लोग भी रह रहे हैं जो झुंड बना के बलात्कार कर रहे हैं हमारे आप के ही बीच ही ऐसा शक्स रह रहा है जो दूसरों की गाढ़ी कमाई से खरीदी गाड़ियां फूंक रहा है हमारे बीच में ही ऐसा शक्स रह रहा है, जो हत्या कर रहा है, आगजनी कर रहा है । मुफ्तखोर भिखारी समाज की तरह हाथ फैला के हर चीज़ मुफ़्त मांग रहा है । सरकार व पुलिस अपराधी को पकड़ के सजा दे सकती है सरकार व पुलिस अपराध के खिलाफ भय बना सकती है पर सबके घर जा के संस्कार तो नही दे सकती । वो माँ बाप भाई दोस्त दे रहे हैं । सरकार हर मर्द, हर औरत के पीछे पुलिस नही लगा सकती कि अपराध होने के पहले रुक जाए हमारा दोस्त जब राह चलते किसी लड़की के सीने, किसी के नितम्ब पर फब्तियां कसता है चाल पे गाने गाता है ,तब हम खूब मजे लेते है । रोका कभी ? धड़ा धड़ अश्लील वीडियो एक दूसरे को व्हाट्सअप करते है, सोचा है कभी.. कि किस बात को बढ़ावा दे रहे हैं ? अपने इलाके की लड़की या लड़के का कोई एक वीडियो mms आ जाये 1 घण्टे में पूरे इलाके में भंडारे के प्रसाद की तरह बंट जाता है । क्या ये छोटा अपराध है ? दूसरे की इज़्ज़त उतरते देखने मे कितना रस लेता है ये समाज । ऐसे वीडियोज़ की यूट्यूब views लाखों में!! कितना मजा आता है दूसरे के बहन बेटी के उतरते कपड़े देखने मे सोचा है किसी दिन अपनी बहन की एक वीडियो आप को आ जाये तो ? पर क्या करें!! हम वो समाज है जिसमे ससुर ,जेठ देवर और पति भरी सभा मे द्रोपदी को नंगा होता देखते रहे थे । अग्निपरीक्षा दे कर लौटी गर्भवती सीता को समाज और पति ने मिल के जंगल खदेड़ दिया । इस काम मे इस अपराध में मर्द, अकेले नही है । बाजार में मोहल्ले में माएं, चाचियांव मामियां भाभियाँ इकट्ठी हो कर अपनी छोड़ कर मुहल्ले की हर लड़की की फ़िगर से कमर तक कि कपड़े से लेकर जूती की हील के नोक तक की चर्चा कर के लड़कों के साथ नाम जोड़ जोड़ कर रोज़ बलात्कार करती हैं । ये हम जो रोज़ रोज़ सामूहिक अपराध कर रहे है उसका जवाब कौन देगा ? हमने कहा कभी भाभी ये चुगली बंद करो, मां ये सब मत बोलो । नही । हम सपरिवार उस चुगली चूरन का मजा लेते है । ऐसे तो हम समाज है । सब को उम्मीद है सरकार हर अपराध का जिम्मा ले क्यों कि चुनाव में कहा था,"बहुत हुआ नारी पर अत्याचार, अब की बार मोदी सरकार । तो हर बच्ची हर औरत की हिफ़ाज़त का जिम्मा उसी का है ! क्या सिर्फ सख्त कानून से ये अपराध रुकेंगे ? चोरी, डाका, हत्या और बलात्कार के लिए सख्त से सख्त कानून है । पर क्या अपराधी अपराध के पहले अन्ज़ाम के बारे में सोचता है ? नहीं सोचता है उसे तो बस, जुनून, सवार रहता है कि जो होगा देखा जाएगा । पहले ये गुस्सा पहले ये बदला पहले ये हवस पहले ये लालच पहले ये मतलब परस्ती निकाल लें अन्ज़ाम बाद में देखेंगे आज समाज़ के हालात का जिम्मेदार कौन है ? हम सरकार या पुलिस ? ? ?

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